कभी यूँ भी हुआ करता था वक़्त,बस कुछ अरसा हुआ,
जहाँ दो लब्ज़ बात भी करने के, बहाने तलाशे जाते थे !
आज इतना खो गए हम,खुद की उलझनों में ही ,
कि अब प्यार भी करते हैं, तो तारीखें देखकर ..!!
जहाँ दो लब्ज़ बात भी करने के, बहाने तलाशे जाते थे !
आज इतना खो गए हम,खुद की उलझनों में ही ,
कि अब प्यार भी करते हैं, तो तारीखें देखकर ..!!
