Thursday, May 24, 2012

भीड़

भीड़ तो दिखती है यहाँ अब भी बहुत,
फिर भी कुछ सूना सा ये शहर लगता है !
रहेने दो हमें इन्ही अंधेरों के तले ,
अब खुले असमानों से बड़ा डर लगता है !
आसान नहीं है तोडना ये उलझनों की दीवारें ,
बाहर तूफानों से घिरा ये मंजर लगता है !
 यादों की महेफिलों में गुजरता है वक़्त अक्सर ,
अब कुछ वीरानियो  से सजा ये घर लगता है !

Tuesday, May 15, 2012

कहानी..














एक दिए के जैसी जलती कहानी ,
चिंगारियों में अक्सर पिघलती कहानी,
आँखों से बहते ये सपने सुनहेरे,
कभी मौसमों सी बदलती कहानी !
कहेती कभी आसमानों को छू लो ,
ऐसे उड़ो की उड़ानों को छू लो ,
कभी हारकर बैठ जाती कहानी,
कभी खुद को ही गुनगुनाती कहानी !
कभी टिमटिमाती,कभी डूब जाती,
कभी फ़िर जगाकर झूठे सपने दिखाती ,
जिंदगी की किताबों में मिलती है अक्सर,
सतरंगी रंगों सी सजती कहानी !
कभी सीधी-साधी ये चलती सी जाती,
कभी मुस्कुराकर बदलती कहानी,
यादों की बारिशें करती ये अक्सर ,
कभी ठहेरे पानी सी चलती कहानी !!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...