Sunday, July 7, 2019

आज का दिन


आज का दिन भी यूं ही गुजर गया, 
कहेने को कुछ खास नहीं,
देखा पलटकर ,कुछ यादों को जाते हुए,
तो मुस्कुरा दिया,अब उदास नहीं ।

फिर मन के किसी कोने से उठकर, ख्याल आया,
और सच कहूं तो मैंने एक कदम भी बढ़ाया,
पर  सोचा की अगर बात होगी भी ,तो तुमसे क्या कहूंगा ,
मेरी खामोशी भी सुन लोगी तुम,शायद चुप ही रहूंगा ।

अब पुराने दोस्तों से बातें बढ़ी,
और किताबे फिर से पढ़ने लगा हूं ,
लिखा था जिनपर, हमने साथ मिलके कभी ,
उन पन्नों को फिर से भरने लगा हूं ।

उठ जाओ,आज ऑफिस नहीं जाना?
बस घड़ी का अलार्म ऐसे नहीं जगाता।
कुछ खाया ? आज क्या बनाया ,ये रोज पूछना,
सीखा है थोड़ा,पर बहुत कुछ अब भी नही बना पाता ।

तुमसे बात करते करते सो जाना ,
कभी गुस्सा करना ,झगड़ना ,फिर मुस्कुराना।
मेरी ही गलती हो ,फिर भी तुम मुझे कैसे माना लेती थी ,
खुद ही सॉरी कहेती, फिर कभी हंसा देती थी ।

कोई जिद सुनने वाला हो , 
तो अक्सर हम ज़िद्दी हो जाते हैं ,
लड़ते हैं अब भी तुमसे यादों में, 
फिर चुपचाप कहीं खो जाते हैं ।

रोज देखने , बात करने की आदत ऐसी ,
की सोचा नहीं ,की वक़्त गुजर गया ,
एक दिन आंख खुली,तो तुम नहीं थे उस मोड़ पे,
पर मैं वहीं ठहर गया ।

कभी अपने सपनों में ,कभी मेरी यादों में ,
मिलोगे कहीं ,तो कुछ बताऊंगा एक दिन,
चला था अबतक हाथ थामकर तुम्हारा,
गिरा हूं आज,तो संभल भी जाऊंगा एक दिन ।

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...