Wednesday, January 9, 2013

कभी सोचता हूँ ..



















कभी सोचता हूँ, ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती !
तब हर एक आँसू ,खुशियों का होता ,
मैं यहाँ मुस्कुराता,वहाँ तू भी न रोता !
देखे जो सपने,हक़ीकत हो जाते ,
गहेरे ये बादल,कहीं खो से जाते !
इधर रोशनियों के मेले से होते,
जो तू साथ होता,हम अकेले न होते !
वो दो -चार दिन का,मिलना-मिलाना,
मेरा खामोश रहेना,तेरा आँसू बहाना  !
मेरी  नादानियों पे,जो तुम  मुस्कुराते ,
तो हम  भी ठहेरते,तुम  भी न जाते !
तब  हर एक हसरत पूरी सी होती ,
मेरी ये ग़ज़ल फिर,अधूरी न होती !
 कभी सोचता हूँ,ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती ....!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...