कभी सोचता हूँ, ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती !
तब हर एक आँसू ,खुशियों का होता ,
मैं यहाँ मुस्कुराता,वहाँ तू भी न रोता !
देखे जो सपने,हक़ीकत हो जाते ,
गहेरे ये बादल,कहीं खो से जाते !
इधर रोशनियों के मेले से होते,
जो तू साथ होता,हम अकेले न होते !
वो दो -चार दिन का,मिलना-मिलाना,
मेरा खामोश रहेना,तेरा आँसू बहाना !
मेरी नादानियों पे,जो तुम मुस्कुराते ,
तो हम भी ठहेरते,तुम भी न जाते !
तब हर एक हसरत पूरी सी होती ,
मेरी ये ग़ज़ल फिर,अधूरी न होती !
कभी सोचता हूँ,ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती ....!
