Wednesday, January 18, 2012

उलझनें..

क्यों खामोश सी चलती हुई जिंदगी अचानक,
एक दिन लाकर खड़ा कर देती है ऐसे मोड़ पर,
जहा से अक्सर लेने पड़ते हैं,राहों के फैसले !
क्यों एक दिन आता है,ऐसा भी जिंदगी में ,
जब छोड़ना पड़ता है,अक्सर उन्हें भी ,
अब तलक जो राह पर,हमसफ़र बनकर चले !
क्यों टूटते हैं एकदिन वो सपने सारे,
किसी कच्चे धागे की कुछ लड़ियों की तरह,
और आँखों से बिखरते हैं आंसुओं के मोती ,
किसी जश्न में जलती फुलझड़ियों की तरह !
अब अपने रास्तों के अँधेरे हम मिटायें भी तो कैसे,
ये जिंदगी आजकल कुछ उदास सी रहेती है ,
किसी मुरझाये फूल की बेरंग पंखुड़ियों की तरह.. !!

Sunday, January 15, 2012

एक बचपन...


आज देखा एक बचपन,
हड्डियों के ढाँचे सा,
एक चाय की दूकान पर,
बर्तन माँजता हुआ !
आँखें कहीं ठहेरी थीं उसकी,
उम्मीदों के कुछ बाकी निशाँ लिए,
हसरतें कुछ और न थीं उसकी,
बस अपनी जिंदगी जीने के अरमाँ लिए !
ख़ुद में कहीं डूबा हुआ,
वो भीड़ में खोया हुआ सा !
मैंने यूँ ही पूछा ,
"माँ बाप कहाँ हैं तेरे ?"
वो बोला "साहब.....,
माँ-बाप होते तो यूँ बचपन नहीं रोता,
सर्दियों की इन रातों में ,
भूखे पेट यूँ सड़कों पे नहीं सोता !"
मैंने पूछा "पढाई नहीं करते क्या ?"
वो बोला "पढना तो है...,
इसलिए ही पैसे जमा कर रहा हूँ ,
पर सुना है कि स्कूल की फीस बहुत होती है,
सोचता हूँ जब कभी पैसे हो जायेंगे,
तो स्कूल में एड्मिसन जरूर लूँगा,
मेरा बचपन तो खो गया कही सड़कों पर,
पर कुछ बच्चों को उनका बचपन जरूर दूँगा !"
मैंने कहा "क्या बनोगे बड़े होकर ?"
वो बोला "बस दफ्तर में बाबू बनना है साहब,
बचपन तो बीत गया,जमीन पर ही बैठे हुए,
पर एक दिन मुझे भी कुर्सी पे बैठना है साहब..... !!"

Friday, January 6, 2012

अक्सर...


हज़ारों की भीड़ में,बस एक तेरा चेहरा तलाश करते हैं,
खामोशियों के साए में,हम खुद से ही बात करते हैं !
राहों पे चलते हुए,तेरे साथ की एक आदत सी हो चली थी,
अब तू नहीं,तो हम तेरी यादों से मुलाकात करते हैं !
हाथों की वो लकीरें,मिट गयी थीं जो कभी,
उनमें हम आज भी, बस तेरी एक लकीर तलाश करते हैं !
भुलाना भी चाहें तो तुझे भूलें कैसे,
वो अफ़साने दिल के दरवाजों पे दस्तक देकर,हमें बेताब करते हैं !
वो सूनी गलियां,जो रोशन थी कभी तेरी मुस्कुराहटों से ,
उन्हें अब  हम तेरी यादों के जुगनुओं से आबाद करते हैं !
बीते हुए वक़्त के बादल,वापस तो अब न आयेंगे,
पर तेरे हाथों के लिखे वो कागज़ के टुकड़े,
अब भी अक्सर तुझे याद करते हैं....!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...