Friday, January 6, 2012

अक्सर...


हज़ारों की भीड़ में,बस एक तेरा चेहरा तलाश करते हैं,
खामोशियों के साए में,हम खुद से ही बात करते हैं !
राहों पे चलते हुए,तेरे साथ की एक आदत सी हो चली थी,
अब तू नहीं,तो हम तेरी यादों से मुलाकात करते हैं !
हाथों की वो लकीरें,मिट गयी थीं जो कभी,
उनमें हम आज भी, बस तेरी एक लकीर तलाश करते हैं !
भुलाना भी चाहें तो तुझे भूलें कैसे,
वो अफ़साने दिल के दरवाजों पे दस्तक देकर,हमें बेताब करते हैं !
वो सूनी गलियां,जो रोशन थी कभी तेरी मुस्कुराहटों से ,
उन्हें अब  हम तेरी यादों के जुगनुओं से आबाद करते हैं !
बीते हुए वक़्त के बादल,वापस तो अब न आयेंगे,
पर तेरे हाथों के लिखे वो कागज़ के टुकड़े,
अब भी अक्सर तुझे याद करते हैं....!

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