Saturday, December 17, 2011

जिंदगी तू कितनी अजीब है !!

जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है ,
हर पल क्यों  तू एक नया मोड़ लेती है ,
वो कहानी जो बिखरी पड़ी थी कांच के टुकड़ों की तरह,
क्यों उन्हें तू एक दिन अचानक जोड़ देती है !
दीवारें वो खामोशियों की जो खड़ी थी दरमियाँ,
कैसे  उन्हें तू यूँ पलों में तोड़ देती है !
जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है ,
हर पल क्यों  तू एक नया मोड़ लेती है !!
कभी जब खाली से लगे ये बादल उम्मीदों के ,
तू रोशनियों की खिड़कियाँ क्यों खोल देती है ,
सन्नाटों की भीड़ में जब घिर जाती है ज़िन्दगी,
चुपके से आके न जाने तू क्या बोल देती है !
अंधेरों में जीने की आदत रही जिसे उम्र भर ,
क्यों तू उस ज़िन्दगी में एक नया रस घोल देती है !
जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है ,
हर पल क्यों  तू एक नया मोड़ लेती है !!
जिनकी कीमत हम न लगा सके उम्र भर ,
उन ज़ज्बातों को भी तू सरेआम यूँ तोल देती है ,
आदत जब पड़ जाये ज़िन्दगी भर किसी सहारे की,
वक़्त -बेवक्त मुस्कुराते हुए तू फिर हाथ छोड़ देती है ,
हारकर तेरी उड़ानों से, बैठे जो किनारों पर चुपचाप,
तू आकर उम्मीदों की कटी पतंग फिर जोड़ देती है !
जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है ,
हर पल क्यों तू एक नया मोड़ लेती है !!


Friday, December 16, 2011

तन्हाईयाँ

 शहर की वीरानियों से  दूर,
तेरी यादों की ढलती शाम पे,
आज घिरा जब तनहाइयों में तो फिर लगा,
ज़िन्दगी में शायद कही कुछ खो सा गया  !
ठोकर लगी जब फिर उसी राह पर चलते हुए ,
और कही भी जब सहारा न मिला ,
दिखे जब हर तरफ अन्जान चेहरे ,तो फिर लगा,
ज़िन्दगी में शायद कही कुछ खो सा गया  !
कभी तेरा साया जो हर पल था साथ मेरे,
जिसकी छाँव में दिन निकल जाता था ,कुछ पलों की तरह,
पर आज जब तन्हाईयों में ,खुद से ही मैं लड़ा,तो फिर लगा,
ज़िन्दगी में शायद कही कुछ खो सा गया  !
यही जिंदगी कभी इतनी खूबसूरत  भी थी,
की उम्मीदों के घरौंदे बना बैठे थे हम ,
आज जब बिखरे वो आशियाने रेत के, तो फिर लगा ,
ज़िन्दगी में शायद कही कुछ खो सा गया  !
मुस्कुराते तो हम अब भी हैं तेरी यादों के साथ,
वो मीठे पल तन्हाईयों  में कभी गुदगुदाते भी हैं,
पर आज जब मुस्कुराते हुए एक आंसू गिरा तो फिर लगा,
हाँ...... जिंदगी में कहीं...कहीं  कुछ  खो सा गया  !!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...