Sunday, March 25, 2012

Paradise..

















Sprinkles of rain drops
The clouds hovering around,
A gush of cold wind,
and birds making sound.
The jungle becomes alive,
And grasses turn green,
Flowers start blooming,
the beauty so unseen .
The smell of wet soil,
And rivers singing music,
The calmness of trees,
The earth acts so mystic,
Sometimes I wonder,
Do Gods really live in skies?
People say its nature,
I call this a Paradise .!!

Tuesday, March 20, 2012

It Matters not..

It matters not to me,
How rough the life has been.
How badly it broke me at times,
and lots of its colours I have seen.
It matters not how many hands left me,
For now,I have lost those counts,
Sometimes it hurts a lot ,
and sometimes funny it sounds.
Now I sit back and wait for my spirits,
knowing that pains are the other half.
And the joy of living through this journey,
makes me smile and laugh !!

Sunday, March 18, 2012

न जाने क्यों ....

कितनी बारिशें आयीं, पर  मिटा न सकी,तेरे पैरों के उन निशानों को,
जो कभी तूने  मेरी छत की गीली रेत  पर ,चल कर  बनाये थे..!
तेरे रुमाल का एक कोना,जो फँस गया था,मेरी कुर्सी के किनारे कभी ,
वो आज भी वही है,और वहीँ रहेना चाहता है ,बरसों तक, न जाने क्यों !
 शाम ढलते ही वो तेरा ,एक चाय का ग्लास ,चुपके से मेरी खिड़की पे रख जाना,
 और अपनी छत पर भागकर,मुझे अखबार पढ़ते ,एकटक देखते जाना ..
अब अपनी चाय अक्सर खुद ही बना लेता हूँ ,अकेले बंद कमरे में  ,
पर अब वो बड़ी फीकी सी लगती है ,न जाने क्यों !
वो खिड़की ,जिससे मुझे तू अक्सर देखा करती थी..
 वो अब बन्द  हो जाया करती है,शाम ढलते ही .. !
गली की उस दूकान पर ,एक दुपट्टा,जो तूने देखा था एक दिन ,
 तेरे लिए वो सँभाल के रक्खा है ,बहुत वक़्त से ..
पर अब उसमें कुछ सलवटें सी पड़ गयी हैं,न जाने क्यों !
 वो पत्थरों का ढेर,अब भी पड़ा है, मेरे कमरे के कोने में ,
जिन्हें तू अक्सर ले आती थी ,नदी के उस पार से ,भगवान् सोचकर,
उन्हें रोज कुछ फूल तो अब भी चढ़ा देता हूँ,जैसा तूने बोला था ..
पर  अब उसमें मुझे भगवान् नहीं दीखता, न जाने क्यों ....!!

Tuesday, March 13, 2012

आखिरी मुलाकात..

सामने होकर भी चुपचाप खोये से क्यों बैठे हैं वो,
ये उनसे आखिरी मुलाकात,इतनी मुश्किल सी क्यों लगती है !
जो अक्सर कहा करते थे मुस्कुराकर,कि भूल जाओ हमें ,
आज उनकी ही आँखें यूँ, आँसुओं से भीगी क्यों दिखतीं हैं.. !!

Thursday, March 8, 2012

होली..

उस बंगले के अन्दर,होली का सा माहौल था ,
और खेल रहे थे कुछ बच्चे,हँसते-खिलखिलाते हुए,
रंगों में लिपटे,खुशियाँ मानते हुए !
और गेट के बाहर,एक छोटी सी लड़की,
उन्हें खेलता देखकर खुश होती जाती थी !
हँसती  थी,जब वो हवा में रंग उड़ाते थे ,
और हर बौछार पर उछलकर तालियाँ बजाती थी !
कुछ देर बाद,अन्दर उस बंगले से ,
बहता हुआ सा कुछ रंग आया !
उस बच्ची ने डरते हुए आस-पास देखा,
और फिर झुककर थोड़ा सा रंग उठाया !
कुछ गीला  किया उन छोटी सी हथेलियों को,
और कुछ अपने गालों पर लगाया !
फिर भागी वो,अपने उस झुण्ड मे,
जहाँ कुछ और भी बच्चे थे उस जैसे ,
फटे कपड़ों में,कुछ बदरंग से !
होली का माहौल तो इधर भी था,
बस,रंग एक ही,कुछ मटमैले पानी सा !
पर आज वो कुछ रंगों में रंगी ,
अपने झुण्ड में अलग सी खड़ी थी !
वो ख़ुशी,जरा सा रंग पाने की ,
उन नन्हीं आँखों में पहले कभी न दिखी थी..!!

Tuesday, March 6, 2012

ख्वाब..

इश्क करना यूँ आसान न था ,कुछ कदम हम चले,और कुछ आप आये !
ये मौसम भी अब कुछ बदले से लगने लगे,आप जब से हमारे साथ आये !
कल आपको पाने की उम्मीद न थी,आज जब आये ये पल,तो बेहिसाब आये !
अब दुआ यही, कि हमारी आँखों के आशियाने में रह जाएँ आप,
फिर हम कभी हकीकत में देखें आपको,और कभी आपका ख्वाब आये !


Sun Shine..


Today shines the sun again,
the darks are about to die.
My body stands tall,
and the spirits are high ,
Life came with all smiles,
No more fears and no more cry !
'How blue it used to be..'
my soul said with a deep sigh .
Now,the fog is long gone,
and clear is my sky !
I am again in my wings,
and again..I am  ready to fly !!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...