Thursday, March 8, 2012

होली..

उस बंगले के अन्दर,होली का सा माहौल था ,
और खेल रहे थे कुछ बच्चे,हँसते-खिलखिलाते हुए,
रंगों में लिपटे,खुशियाँ मानते हुए !
और गेट के बाहर,एक छोटी सी लड़की,
उन्हें खेलता देखकर खुश होती जाती थी !
हँसती  थी,जब वो हवा में रंग उड़ाते थे ,
और हर बौछार पर उछलकर तालियाँ बजाती थी !
कुछ देर बाद,अन्दर उस बंगले से ,
बहता हुआ सा कुछ रंग आया !
उस बच्ची ने डरते हुए आस-पास देखा,
और फिर झुककर थोड़ा सा रंग उठाया !
कुछ गीला  किया उन छोटी सी हथेलियों को,
और कुछ अपने गालों पर लगाया !
फिर भागी वो,अपने उस झुण्ड मे,
जहाँ कुछ और भी बच्चे थे उस जैसे ,
फटे कपड़ों में,कुछ बदरंग से !
होली का माहौल तो इधर भी था,
बस,रंग एक ही,कुछ मटमैले पानी सा !
पर आज वो कुछ रंगों में रंगी ,
अपने झुण्ड में अलग सी खड़ी थी !
वो ख़ुशी,जरा सा रंग पाने की ,
उन नन्हीं आँखों में पहले कभी न दिखी थी..!!

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