Tuesday, November 19, 2013

शायद...

 ये फासले एक दिन दूरियां बन जाएँ,
तो हम बिखर जायेंगे शायद ,
 ये आदतें कभी मजबूरियाँ बन जायें,तो
हम बिखर जायेंगे शायद !

बड़ी दूर मंजिल थी, जरा सा हम चले हैं अब,
कहीं बीच में तुम ठहेरे,तो
हम बिखर जायेंगे शायद !
इधर तो हम खड़े कब से,उधर उनकी वो तन्हाई ,
कहीं फिर वो अंधेरों में उलझे,तो हम बिखर जायेंगे शायद !
राह लम्बी बहुत है अब,कि जिसपे चल पड़े थे हम ,
वो किसी मोड़ पे मुड़ जाएं,तो हम बिखर जायेंगे शायद !
बड़े  सपने सजाये थे,बड़े ही ख्वाब देखे थे ,
सपनों से उतरके हक़ीक़त में जो आ जाएं,तो हम बिखर जायेंगे शायद !
धुन्धली सी ये तस्वीरें,कहाँ तक आँखों में इन्हें रक्खें ,
कहीं दो बूँद गिर जाएं,तो हम बिखर जायेंगे शायद !
अभी कल ही तो संभले हैं,अभी उड़ना नहीं आता ,
 कहीं फिर से अब फिसले ,तो हम बिखर जायेंगे शायद !

Monday, September 9, 2013

चलो आज फिर....













चलो  आज थोड़ी सी जिंदगी साथ जीते हैं ,
कुछ लम्हों के ज़ाम मिलके पीते हैं।
आज फिर से खिलखिलाकर हँसना सीखते हैं,
बारिश के पानी में फिर साथ भीगते हैं।
हाथों में हाथ थामे चलो कही चलते हैं,
उन पुरानी यादों में फिर साथ पिघलते हैं।
चलो वही नादनियाँ फिर एक बार करते हैं,
साथ गिरते हैं ,और फिर संभलते हैं।
चलो  आज थोड़ी सी जिंदगी साथ जीते हैं ,
कुछ लम्हों के ज़ाम मिलके पीते हैं। 

Friday, April 12, 2013

क्यूँ....


क्यूँ जिंदगी की किताबों में छिपी,
कुछ कहानियाँ अक‍सर अधूरी रहतीं हैं!
मिट भी जाते हैं अगर,लफ्जों के फ़ासले,
फिर दिलों के दरमियाँ,क्यूँ दूरी रह्ती है!
खुशकिस्मत हैं वो,जो मुस्कुराते हैं हर पल,
वरना किसी की हर ख्वाहिश कहाँ पूरी होती है!

Wednesday, January 9, 2013

कभी सोचता हूँ ..



















कभी सोचता हूँ, ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती !
तब हर एक आँसू ,खुशियों का होता ,
मैं यहाँ मुस्कुराता,वहाँ तू भी न रोता !
देखे जो सपने,हक़ीकत हो जाते ,
गहेरे ये बादल,कहीं खो से जाते !
इधर रोशनियों के मेले से होते,
जो तू साथ होता,हम अकेले न होते !
वो दो -चार दिन का,मिलना-मिलाना,
मेरा खामोश रहेना,तेरा आँसू बहाना  !
मेरी  नादानियों पे,जो तुम  मुस्कुराते ,
तो हम  भी ठहेरते,तुम  भी न जाते !
तब  हर एक हसरत पूरी सी होती ,
मेरी ये ग़ज़ल फिर,अधूरी न होती !
 कभी सोचता हूँ,ज़िन्दगी ऐसी होती,
मेरी ये कहानी,तेरे जैसी होती ....!

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...