Monday, September 9, 2013

चलो आज फिर....













चलो  आज थोड़ी सी जिंदगी साथ जीते हैं ,
कुछ लम्हों के ज़ाम मिलके पीते हैं।
आज फिर से खिलखिलाकर हँसना सीखते हैं,
बारिश के पानी में फिर साथ भीगते हैं।
हाथों में हाथ थामे चलो कही चलते हैं,
उन पुरानी यादों में फिर साथ पिघलते हैं।
चलो वही नादनियाँ फिर एक बार करते हैं,
साथ गिरते हैं ,और फिर संभलते हैं।
चलो  आज थोड़ी सी जिंदगी साथ जीते हैं ,
कुछ लम्हों के ज़ाम मिलके पीते हैं। 

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...