Sunday, October 27, 2019

Tragic tale

A tragic tale,
Her tears burst.
She is used at times,
Then left to rust.
Some lustfull eyes,
Stuck at her bosom,
Commented upon,
She is treated like dust.
lured to some pennies,
Like an object,
Her body is played with,
and feelings crushed.
She too is a human,
In our world.
Yet, she cries silently,
losing her trust !

A little kid in that train

Moves from coach to coach,
A Little kid in that train,
For some coins he sings,
And tries hard to entertain.
People laugh and clap,
But he dreams of a day,
When he smiles and laughs too,
As much as he may.
Fear of survival lies ahead,
Dull face, blank eyes,
Returns empty handed today,
Sleeps without food and cries.
A little kid in that train,
Tries hard to entertain..

Saturday, October 12, 2019

लहरें

रुकी हुई सी लहर, तुम अब कहां जाओगी ,
वापस समंदर में बहोगी, या किनारों पे लौट आओगी ?
बहुत फर्क तो नहीं तुम्हारी और मेरी जिंदगी में,
पता नहीं कहां से चली , और कभी रुक पाओगी ?

तमाम साहिल तो मिले होंगे तुमको भी,
कुछ कहानियां , कुछ किस्से क्या मुझे सुनाओगी ?
देखा भी होगा पलट के किनारों की ओर ,
फिर तूफानों में घिरी होगी, और समंदर में लौट जाओगी।

यूं तो सदियों के सफर का तजुर्बा तुमको,
पर आज मेरी जिंदगी की किताबें खोलें?
हजारों राज़ छुपे हैं, हमारे भी सीने में,
थोड़ा फुरसत से तुम बैठो , फिर कुछ हम बोलें ?

पर तुम उलझनों के समंदर में, हम खामोशियों के दायरों में,
मुमकिन नहीं शायद, की अब हम कुछ बात करें,
वक़्त की आंधियों में, लिपटी हमारी जिंदगी,
अब कैसे ये फासले तय करें, और फिर मुलाकात करें।

Tuesday, October 8, 2019

फासले



आज इजाज़त दो, तो तुमसे ,तुम्हारी शिक़ायत करूं।
कुछ अपनी कहानी सुनाऊं, कुछ तुमसे लड़ूं ।

कहां से शुरू करूं, थोड़ा सा ही वक़्त अभी बाकी है,
अपनी कहानी के पन्नों में,अब मेरी शिकायतें ही मेरी साथी हैं।

कुछ ना सुनना आदत मेरी,ना कह पाना मजबूरी तुम्हारी,
मुस्कुराहटों का चेहरे पे बहुत कम आना, ऐसी ही बातें बहुत सारी।

लड़ते पर अपनी बात कह देते ,क्या मिला यूं खामोशियों से उलझ जाने में,
चंद कदमों की जिंदगी, बीत गई कुछ पास, कुछ दूर जाने में ।

खो जायेंगे हम भी भीड़ में,अब वो मुलाकातें कहां होंगी,
कहेने को होगा बहुत कुछ, पर वो शामें ,वो रातें कहां होंगी ।

ये कहानी यहीं तक थी शायद, कुछ कहेना है तो आज कह देना,
ये वक़्त भी फिसल जाएगा कल, बस जाने की इजाज़त दे देना।

अब दूरियां बढ़ेंगी,कुछ फासले होंगे, फिर मिलना कहां होगा,
बदल चुके हम पता अपना,अब ना वो गली, ना मकां होगा ।

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...