रुकी हुई सी लहर, तुम अब कहां जाओगी ,
वापस समंदर में बहोगी, या किनारों पे लौट आओगी ?
बहुत फर्क तो नहीं तुम्हारी और मेरी जिंदगी में,
पता नहीं कहां से चली , और कभी रुक पाओगी ?
तमाम साहिल तो मिले होंगे तुमको भी,
कुछ कहानियां , कुछ किस्से क्या मुझे सुनाओगी ?
देखा भी होगा पलट के किनारों की ओर ,
फिर तूफानों में घिरी होगी, और समंदर में लौट जाओगी।
यूं तो सदियों के सफर का तजुर्बा तुमको,
पर आज मेरी जिंदगी की किताबें खोलें?
हजारों राज़ छुपे हैं, हमारे भी सीने में,
थोड़ा फुरसत से तुम बैठो , फिर कुछ हम बोलें ?
पर तुम उलझनों के समंदर में, हम खामोशियों के दायरों में,
मुमकिन नहीं शायद, की अब हम कुछ बात करें,
वक़्त की आंधियों में, लिपटी हमारी जिंदगी,
अब कैसे ये फासले तय करें, और फिर मुलाकात करें।
वापस समंदर में बहोगी, या किनारों पे लौट आओगी ?
बहुत फर्क तो नहीं तुम्हारी और मेरी जिंदगी में,
पता नहीं कहां से चली , और कभी रुक पाओगी ?
तमाम साहिल तो मिले होंगे तुमको भी,
कुछ कहानियां , कुछ किस्से क्या मुझे सुनाओगी ?
देखा भी होगा पलट के किनारों की ओर ,
फिर तूफानों में घिरी होगी, और समंदर में लौट जाओगी।
यूं तो सदियों के सफर का तजुर्बा तुमको,
पर आज मेरी जिंदगी की किताबें खोलें?
हजारों राज़ छुपे हैं, हमारे भी सीने में,
थोड़ा फुरसत से तुम बैठो , फिर कुछ हम बोलें ?
पर तुम उलझनों के समंदर में, हम खामोशियों के दायरों में,
मुमकिन नहीं शायद, की अब हम कुछ बात करें,
वक़्त की आंधियों में, लिपटी हमारी जिंदगी,
अब कैसे ये फासले तय करें, और फिर मुलाकात करें।
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