क्यों खामोश सी चलती हुई जिंदगी अचानक,
एक दिन लाकर खड़ा कर देती है ऐसे मोड़ पर,
जहा से अक्सर लेने पड़ते हैं,राहों के फैसले !
क्यों एक दिन आता है,ऐसा भी जिंदगी में ,
जब छोड़ना पड़ता है,अक्सर उन्हें भी ,
अब तलक जो राह पर,हमसफ़र बनकर चले !
क्यों टूटते हैं एकदिन वो सपने सारे,
किसी कच्चे धागे की कुछ लड़ियों की तरह,
और आँखों से बिखरते हैं आंसुओं के मोती ,
किसी जश्न में जलती फुलझड़ियों की तरह !
अब अपने रास्तों के अँधेरे हम मिटायें भी तो कैसे,
ये जिंदगी आजकल कुछ उदास सी रहेती है ,
किसी मुरझाये फूल की बेरंग पंखुड़ियों की तरह.. !!
एक दिन लाकर खड़ा कर देती है ऐसे मोड़ पर,
जहा से अक्सर लेने पड़ते हैं,राहों के फैसले !
क्यों एक दिन आता है,ऐसा भी जिंदगी में ,
जब छोड़ना पड़ता है,अक्सर उन्हें भी ,
अब तलक जो राह पर,हमसफ़र बनकर चले !
क्यों टूटते हैं एकदिन वो सपने सारे,
किसी कच्चे धागे की कुछ लड़ियों की तरह,
और आँखों से बिखरते हैं आंसुओं के मोती ,
किसी जश्न में जलती फुलझड़ियों की तरह !
अब अपने रास्तों के अँधेरे हम मिटायें भी तो कैसे,
ये जिंदगी आजकल कुछ उदास सी रहेती है ,
किसी मुरझाये फूल की बेरंग पंखुड़ियों की तरह.. !!
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