पलटोगे कभी जो जिंदगी के पन्ने ,
तो कहीं कुछ पन्नों में हम भी दिख जायेंगे।
बहुत नए से चेहरे होंगे तेरी दुनिया में ,
पर कुछ चेहरों में सिर्फ़ हम नज़र आएँगे।
तेरे पास तो न होंगे ,पर अपनी उन शरारतों से ,
कभी हसाएँगे तुझे ,तो कभी रुलायेंगे।
जब कभी रातों में ,तन्हाइयों का डर लगे ,
तो तेरी नींद में आके ,चुपके से कुछ कह जायेंगे।
कहानी थी एक,जो उड़ चली वक़्त के साथ ,
अब तो हम बस बंद आँखों से ही नज़र आएँगे।
कभी जो मिले किसी मोड़ पे, इत्तेफ़ाक़ से ,
तो फिर तेरा हाथ थामे ,तुझे उस पार ले जायेंगे।
तुझ सा हँसता हुआ तो न होगा शायद ,
पर तुझे अपना वो वीरान सा आशियाँ दिखाएँगे।
खामोशियों से फिर कुछ बातें होंगी अपनी ,
और हम आँखों से बहुत कुछ कह जायेंगे।
अब तक जो ठहरा था ,वो सपना था एक ,
कल शायद हम फिर अजनबी बन जायेंगे।
कभी फ़िर मिलेंगे रास्ते अपने,ज़िन्दगी की दौड़ में ,
तब तेरे पास से गुजरेंगे ,और तुझे नज़र भी न आएँगे।
तू शीशा है ,तो पत्थर हम भी नहीं,
कभी जो ठोकर लगी ,तो टुकड़ों में बिखर जायेंगे।
तो कहीं कुछ पन्नों में हम भी दिख जायेंगे।
बहुत नए से चेहरे होंगे तेरी दुनिया में ,
पर कुछ चेहरों में सिर्फ़ हम नज़र आएँगे।
तेरे पास तो न होंगे ,पर अपनी उन शरारतों से ,
कभी हसाएँगे तुझे ,तो कभी रुलायेंगे।
जब कभी रातों में ,तन्हाइयों का डर लगे ,
तो तेरी नींद में आके ,चुपके से कुछ कह जायेंगे।
कहानी थी एक,जो उड़ चली वक़्त के साथ ,
अब तो हम बस बंद आँखों से ही नज़र आएँगे।
कभी जो मिले किसी मोड़ पे, इत्तेफ़ाक़ से ,
तो फिर तेरा हाथ थामे ,तुझे उस पार ले जायेंगे।
तुझ सा हँसता हुआ तो न होगा शायद ,
पर तुझे अपना वो वीरान सा आशियाँ दिखाएँगे।
खामोशियों से फिर कुछ बातें होंगी अपनी ,
और हम आँखों से बहुत कुछ कह जायेंगे।
अब तक जो ठहरा था ,वो सपना था एक ,
कल शायद हम फिर अजनबी बन जायेंगे।
कभी फ़िर मिलेंगे रास्ते अपने,ज़िन्दगी की दौड़ में ,
तब तेरे पास से गुजरेंगे ,और तुझे नज़र भी न आएँगे।
तू शीशा है ,तो पत्थर हम भी नहीं,
कभी जो ठोकर लगी ,तो टुकड़ों में बिखर जायेंगे।
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