Saturday, November 26, 2011

तलाश

मीलों तक चले आये ,
कुछ सोचते हुए ,
जाने क्यों उनकी तलाश में !
यादें जो भूली हुई थी ,
आती हैं कभी लहेरों सी .
एक चेहरा मुस्कुराता हुआ,
अब याद नहीं इस भीड़ में ,
कहा खो गया....
धुएं के एक बादल सा !
डर....एक अनजाना सा लगता ,
वो मिलें न मिलें ,क्या पता !
कभी लौट जाना भी चाहा इस डर से ,
फिर सोचा दो कदम और सही ...
बस दो कदम....शायद कही मिल जाये ,
फिर उसी राह पर, चेहरा वही !
चल पड़े कदम ये सोचकर ,
खोया हुआ कल पाने की आस में ,
उठे चुपचाप और फिर चले हम ,
न जाने क्यों उनकी तलाश में .....!!

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