पलट कर पुरानी यादों के पन्ने,
सोचा की आज कुछ नया लिखूं !
कहूँ कोई कहानी तेरी रौशनी की आज,
सोचा की आज कुछ नया लिखूं !
कहूँ कोई कहानी तेरी रौशनी की आज,
अब अपने अंधेरों की दास्ताँ मैं क्या लिखूं !
बयाँ करूँ तेरी नीली आँखों की झीलों को,
या उन शोख अदाओं का फ़लसफ़ा लिखूं !
कहूँ खुद को तेरी एक झलक का आशिक,
और तुझे मुहब्बत का ख़ुदा लिखूं .... !
या उन शोख अदाओं का फ़लसफ़ा लिखूं !
कहूँ खुद को तेरी एक झलक का आशिक,
और तुझे मुहब्बत का ख़ुदा लिखूं .... !
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