Sunday, April 15, 2012

एक नाव सी चलती ये ज़िन्दगी..














एक नाव सी चलती हुई ये ज़िन्दगी,
 कभी डूबती-उतराती  सी है !
मझधारों मे फँसती है कभी ,
कभी लहेरों के थपेड़े खाती है !
तेज़ हवाओं में  डगमगाती अक्सर,
तो कभी खुद ही संभल जाती है !
तूफानों का सामना करती है कभी ,
तो कभी टूट कर  बिखर जाती भी है !
रूकती है अपने किनारों पर कुछ वक़्त को,
फिर चुपचाप लहेरों के साथ चली जाती है !
एक नाव सी चलती हुई ये ज़िन्दगी.......!



No comments:

Post a Comment

Hope

Looking out of the window, as things pass by, Wishing we could survive this catastrophe. The one which looked impossible at first, But t...