ये फासले कभी दूरियां बनी,तो शायद हम बिखर जाएं,
ये आदतें फिर मजबूरियाँ बनी,तो शायद हम बिखर जाएं ।
बड़ा मुश्किल है ये रास्ता,जरा सा फिर चले हैं अब,
कहीं तुम बीच में ठहेरे,तो शायद हम बिखर जाएं ।
इधर तो हम खड़े कब से,उधर कुछ वक़्त का थमना,
कहीं तुम खोए अंधेरों में,तो शायद हम बिखर जाएं ।
धुन्धली सी तेरी तस्वीर,आंखों में कहां रखें ,
कहीं दो बूँद गिर जाएं,तो शायद हम बिखर जाएं ।
अभी कल ही तो संभले हैं,अभी उड़ना नहीं आता ,
कहीं फिर से जो अब फिसले ,तो शायद हम बिखर जाएं ।
वही एक रोशनी हो तुम,इन अकेले से अंधेरों में,
जरा सा मुस्कुरा दो जो,तो ये लम्हा गुज़र जाए ।
ये आदतें फिर मजबूरियाँ बनी,तो शायद हम बिखर जाएं ।
बड़ा मुश्किल है ये रास्ता,जरा सा फिर चले हैं अब,
कहीं तुम बीच में ठहेरे,तो शायद हम बिखर जाएं ।
इधर तो हम खड़े कब से,उधर कुछ वक़्त का थमना,
कहीं तुम खोए अंधेरों में,तो शायद हम बिखर जाएं ।
धुन्धली सी तेरी तस्वीर,आंखों में कहां रखें ,
कहीं दो बूँद गिर जाएं,तो शायद हम बिखर जाएं ।
अभी कल ही तो संभले हैं,अभी उड़ना नहीं आता ,
कहीं फिर से जो अब फिसले ,तो शायद हम बिखर जाएं ।
वही एक रोशनी हो तुम,इन अकेले से अंधेरों में,
जरा सा मुस्कुरा दो जो,तो ये लम्हा गुज़र जाए ।
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